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Piles

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बवासीर (PILES)

यह दो प्रकार का होता है, (1) खूनी बवासीर (2) बादी बवासीर

खूनी बवासीर

इसमें गुदा द्वार पर मस्से होते हैं, यह मस्से 1 से लेकर 3 या 4 भी होते हैं, टट्टी के समय गुदा द्वार वाले मस्से बाहर आ जाते हैं, जो शौच (धोते समय) हाथ में लगते हैं, महसूस किया जाता है। या किसी-किसी रोगी को यह मस्से गुदा द्वार के अंदर होते हैं। वह टट्टी के समय बाहर नहीं निकलते तो शौच (धोते समय) हाथ मे नहीं लगते जो महसूस किया जाए। जब कोई वादी चीजें रोगी लगातार 2-4 दिन तक खा लिया तो इन दोनों तरह के मस्सों से खून निकलता है, यह खून किसी को कम, या किसी को ज्यादा निकलता है। 2-4 दिन के बाद यह खून निकलना अपने आप बंद हो जाता है। जब दोबारा बादी चीज जाने अनजाने में रोगी खा लेता है, तो फिर से दो-चार दिन या हफ्ते तक खून निकलकर बंद हो जाता है, यह कृया निरंतर बनी रहती है।

वादी बवासीर

इस रोग मे मस्से गुदा द्वार पर नहीं होते। कुछ घमोरियो के दाने जैसे गुदा द्वार से ज्यादा अंतर होते हैं, जो कि शौच (धोते समय) हाथों में महसूस नहीं किए जाते। इस में रोगी को गैस बहुत ज्यादा बनती है, जिसके कारण कई बार लीवर में घाव हो जाता है, तो उस घाव से टट्टी के समय बूॅद-बूॅद या धार बनकर खून गिरता है। यह घाव यदि समय रहते नहीं ठीक किया गया तो उस घाव पर इंफेक्शन बढ़कर यह कैंसर का रूप धारण कर सकता है।

बवासीर का उपचार

1 - खूनी बवासीर में मस्से होते हैं, उन मस्सों में मात्र एक बार ही दुर्लभ जड़ी-बूटियों से बनी औषधि लगा दी जाती है, जो 1 से 2 माह में ठीक हो जाता है।

2 - वादी बवासीर इसमें केवल खाने-पीने की औषधि दी जाती है।

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